
आदिवासीयो के जल जंगल और जमीन की लडाई का दमन और संविधानिक अधिकारों को कुचलने के लिए षडयंत्रकारी कानून वन संरक्षण संवर्धन अधिनियम 1980 संशोधन 2023 संसद ने पास किया
शहडोल / जिला संवाददाता सुनील रैदास
जब से मोदी जी की भाजपा सरकार केन्द्र की सत्ता पर काबिज हुई हैं तबसे आदिवासियों का दमन और उत्पीड़न पहले से कयी गुना तेज हो गया है और हमारे आदिवासी विधायक सासद चाहे वो भाजपा के हो या कांग्रेस के हो गूगे बहरे बनकर उक्त पार्टीयो की हरवाही कर रहे और सत्ता सुख के लुप्त उठा रहे है और आदिवासी समाज अन्याय अत्यचार उत्पीड़न की भयंकर आग मे जल रहा है साथियों मै बडे दुखित चिंतित मन से अपने आदिवासी सासंद और बिधायको को जो भाजपा और कांग्रेस मे है उनकी बुजदिली निकम्मेपन कोस रहा हूँ और गाणडूगीरी कह रहा हूँ कयों?
इस लिये कि देश आजादी के 78साल होने को है और संविधान लागू हुए 76 साल होने को है इतने सालो के बाद आदिवासीयो के कल्याण उन्नति के लिए संरक्षण संवर्धन के लिए संविधान मे कयी प्रावधान किये गए है लेकिन उन प्रावधानों को आज तक धरातल मे हमारे निकम्मे नकारे आदिवासी सासंद विधायक लागू नहीं करवा पाये और न ही इन प्रावधानों को लागू करवाने के लिए लडाई लडी
वैसे तो आदिवासियों के कल्याण और उन्नति और संरक्षण संवर्धन के लिए संविधान मे कयी प्रावधान जैसे अनुच्छेद 13 (3) क,अनुच्छेद 15 (4), 19(5), 16(4)क 17 , 23 ये सभी मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्व अनुच्छेद 46,अनुच्छेद 332, 333, 334, 335,अनुच्छेद 338(क) 339, 342,ये सभी आदिवासीयो के कल्याण उन्नति और संरक्षण संवर्धन के लिए संविधान मे कयी प्रावधान किये गए है लेकिन इनसे महत्वपूर्ण प्रावधान है पांचवी अनुसूची और छठवीं अनुसूची अनुच्छेद 244(1), और 244(2) जो यह प्रावधान करती है कि आदिवासियों को स्वतंत्र स्वायत्त शासन स्वशासन करने का अधिकार है ऐसा प्रावधान है इसका अर्थ है कि चाहे केंद्रीय कानून हो चाहे विधानमंडल का कानून हो अनुसूचित छेतृ और जनजातीय छेतृ मे आदिवासियों के सहमति के बिना लागू नहीं होगे ये बात कितने आदिवासी भाई बहनों को आदिवासी अधिकारी कर्मचारीयो को समझ मे आया है मै नही जानता लेकिन गंभीर अधययन के बाद मुझे समझ आ गया है इस लिये आदिवासियों के संविधानिक अधिकारों की लडाई लडने के उक्त अधिकारों को धरातल में लागू कराने के लिए और संविधान को पुर्ण रुप से लागू कराने के लिए संविधान खत्म किया जा रहा है उसकी रक्षा के लिए लोकतंत्र के रक्षा के लिए लाल बहादुर सिंह नेटी विंध्य प्रभारी भारत आदिवासी पार्टी मध्यप्रदेश लडाई लडना चाहता हैं मै सभी एसी एसटी ओ बी सी वंचित शोषित और अन्य दुर्बल के लोग जो संविधान को मानते और जानते है आप सभी से अनुरोध है कि वयवस्था परिवर्तन की लडाई और संघर्ष मे मेरा तन मन धन से सहयोग करने का कष्ट कर-

लाल बहादुर सिंह नेटी – विंध्य प्रभारी भारत आदिवासी पार्टी


